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दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (NRF) की ओर से प्रकाशित सामग्री के अनुसार, शोध में AI का उपयोग करके प्राप्त किए गए परिणामों की अंतिम ज़िम्मेदारी शोधकर्ता पर ही रहती है। यह स्पष्टीकरण AI युग में शोध अखंडता से जुड़े बढ़ते बहस के बीच सामने आया है।
NRF के प्रकाशन में शामिल सामग्री (ine.nrf.re.kr/magazine/2607 पर उपलब्ध बॉक्स चित्रण) के अनुसार, शोध प्रक्रिया में AI को एक सहायक उपकरण के रूप में देखा जाता है, लेकिन AI के माध्यम से तैयार किए गए आउटपुट के लिए जवाबदेही उस शोधकर्ता पर होती है जिसने उस उपकरण का उपयोग किया है।
इसका अर्थ यह है कि AI द्वारा उत्पन्न त्रुटियों, पक्षपात या असत्य सामग्री के लिए AI को नहीं, बल्कि उसका उपयोग करने वाले शोधकर्ता को उत्तरदायी माना जाता है।
यह स्पष्टीकरण उस समय आया है जब LLM जैसी AI तकनीकों का शैक्षणिक और अनुसंधान क्षेत्र में उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं के लिए यह इंगित करता है कि AI-सहायित परिणामों की सत्यापन और ज़िम्मेदारी उनकी अपनी नैतिक दायित्व के अंतर्गत आती है।
सामग्री में यह बात तथ्य के रूप में प्रस्तुत की गई है; हालांकि इस नियम को किन परिस्थितियों में और किस तरह लागू किया जाए, इसकी विस्तृत व्याख्या उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट नहीं है।
यह दृष्टांत सत्य है: शोध में AI का उपयोग करके बनाए गए परिणामों की ज़िम्मेदारी शोधकर्ता पर ही रहती है — Verdict: सही