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कोरिया के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश चो ही-दे (조희대) द्वारा न्यायाधीशों के पुनर्नामांकन (재제청) को अस्वीकारने के बाद राजनीतिक तनाव गहरा गया है। राष्ट्रपति भवन (靑) ने इस कदम की प्रतिक्रिया देते हुए इसे संविधान के विपरीत बताया है, जिससे न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संघर्ष सामने आ रहा है।
मुख्य न्यायाधीश चो ही-दे ने न्यायाधीशों के नामांकन को दोबारा राष्ट्रपति के पास भेजने की प्रक्रिया (पुनर्नामांकन) को अस्वीकार कर दिया। इस कदम के बाद राष्ट्रपति भवन ने आधिकारिक स्तर पर पलटवार करते हुए कहा कि यह कार्यवाही संविधान ("헌법에 위배") के अनुरूप नहीं है। राष्ट्रपति भवन का यह बयान न्यायपालिका पर सीधी टिप्पणी माना जा रहा है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से यह बयान उस समय आया जब न्यायाधीशों के पुनर्नामांकन के अस्वीकरण को लेकर संवैधानिक विवाद तेज हो रहा था। राष्ट्रपति भवन का तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय का यह रुख संविधान में निहित प्रक्रियाओं के विपरीत है। दूसरी ओर, सर्वोच्च न्यायालय के आधिकारिक वेबसाइट पर मुख्य न्यायाधीश की छवि के साथ "स्वतंत्रता, समानता, न्याय" (자유 평등 정의) का आदर्श वाक्य प्रदर्शित है, जिसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
इस घटनाक्रम से न्यायपालिका और राष्ट्रपति भवन के बीच संवैधानिक व्याख्या को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पुनर्नामांकन प्रक्रिया पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनेगी या नहीं, यह अभी अनिश्चित है।
इस आधार पर संबंधित दावे का निर्णय है — Verdict: सही