आंशिक रूप से सही
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता में लौटने के बाद संघीय स्तर पर एक समर्पित AI नियामक संस्था बनाने की योजना कार्यान्वित नहीं हो सकी। ऐसा ही एक दावा सोशल मीडिया पर प्रचलित है, जिसके अनुसार इसके पीछे NVIDIA के CEO जेन्सन ह्वांग, Meta के मार्क ज़करबर्ग और Elon Musk का ट्रम्प पर प्रभाव मुख्य कारण था। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा पूरी तरह नहीं, बल्कि सीमित रूप से समर्थित है।
दावे के अनुसार तीन प्रमुख टेक कंपनियों के प्रमुखों — जेन्सन ह्वांग, मार्क ज़करबर्ग और Elon Musk — ने ट्रम्प को समझाकर AI क्षेत्र के लिए एक विशेष नियामक संस्था (regulatory agency) की स्थापना की योजना को रोक दिया।
यह स्थापित है कि ट्रम्प प्रशासन ने AI नियमन के मौजूदा ढांचे को कमज़ोर किया और संघीय स्तर पर नई नियामक संस्था बनाने की कोई पहल आगे नहीं बढ़ी। यह भी सत्य है कि ह्वांग, ज़करबर्ग और Musk ने इस अवधि में ट्रम्प से मुलाक़ातें कीं और टेक उद्योग के साथ प्रशासन के रिश्ते पहले की तुलना में करीब हुए।
हालांकि, यह सीधे तौर पर सिद्ध नहीं है कि इन तीनों की लॉबिंग ही नियामक संस्था की योजना के न बनने का निर्णायक कारण थी। नियामक ढांचे को लेकर व्यापक नीतिगत दिशा और राजनीतिक प्राथमिकताओं के बदलाव को भी मुख्य संदर्भ माना जा सकता है, और इस दावे के पक्ष में कोई प्रत्यक्ष दस्तावेज़ या प्रमाण नहीं मिला है। यह अनिश्चितता बरकरार है।
प्रशासन की नीतिगत दिशा और टेक CEO की मुलाक़ातें दोनों पक्ष वास्तविक हैं, लेकिन कार्य-कारण संबंध (causal link) अपुष्ट है; इसलिए इस दावे का निष्कर्ष यह है — Verdict: आंशिक रूप से सही