ज़्यादातर सही
दक्षिण कोरिया में AI से बनी उपन्यास (AI 소설) से जुड़े विवाद पर न्यायाधीशों ने अपने फ़ैसलों (판결문) में कड़ी भाषा का इस्तेमाल किया है। फ़ैसलों में 'हेउी पँग्योल' (허위 판결, झूठा निर्णय), 'बिओप-वन किमांग' (법원 기망, न्यायालय को गुमराह करना) और 'बुलबोपसोंग जुंगदे' (불법성 중대, अवैधता का गंभीर होना) जैसे शब्द दर्ज किए गए हैं। यह जानकारी संबद्ध दावे और न्यायिक प्रशिक्षण सामग्री के हवाले से सामने आई है।
AI से लिखी गई उपन्यास से जुड़े मामलों में कोरियाई न्यायाधीशों ने फ़ैसलों में स्पष्ट रूप से लिखा कि संबंधित आचरण में 'झूठा निर्णय' प्रस्तुत करना, 'न्यायालय को गुमराह करना' शामिल था और इसकी 'अवैधता गंभीर' थी। न्यायाधीशों की इस प्रतिक्रिया को तीखा ('뿔난', क्रोधित) बताया गया है।
इस विषय पर न्यायिक प्रशिक्षण संस्थान (사법연수원) की न्यायाधीश प्रशिक्षण सामग्री — दिनांक 4 सितंबर 2026 — का उल्लेख है, जो अनाउंस किए अनुसार गैर-सार्वजनिक है और खुले वेब स्रोतों में उपलब्ध नहीं है। इसी कारण इस सामग्री की सटीक सामग्री और विवरण अपुष्ट बना हुआ है। कुल तीन प्राथमिक स्रोतों की समीक्षा के आधार पर इस दावे को अंततः 'लगभग सत्य' का स्तर दिया गया है।
चूंकि न्यायिक प्रशिक्षण सामग्री सार्वजनिक नहीं है, यह स्पष्ट नहीं है कि फ़ैसलों में दर्ज इन अभिव्यक्तियों का सटीक संदर्भ, संबंधित मामलों की संख्या और न्यायालयों की स्तर विशेष क्या था। ये विवरण पुष्टि के इंतज़ार में हैं।
AI-नॉवेल विवाद पर कोरियाई न्यायाधीशों के फ़ैसलों में 'झूठा निर्णय' और 'न्यायालय को गुमराह करना' जैसी अभिव्यक्तियाँ दर्ज होने का यह दावा उपलब्ध स्रोतों के आधार पर ज़्यादातर सही है।