ज़्यादातर सही
शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिज़नेस के प्रोफेसर निकोलस पोल्सन ने दावा किया है कि AI का इस्तेमाल करते हुए 9 महीनों में 200 शोध-पत्र लिखना संभव है। यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है, और इसे उनके सार्वजनिक अभिव्यक्ति के आधार पर बड़े पैमाने पर सही माना जा सकता है, हालाँकि इसके पीछे की व्यावहारिक प्रक्रिया के बारे में कई सवाल अनुत्तरित हैं।
पोल्सन ने एक सार्वजनिक संदर्भ में संकेत दिया कि AI उपकरणों की मदद से शोध लेखन की गति इतनी बढ़ सकती है कि 9 महीने की अवधि में 200 पत्र तैयार किए जा सकें। यह संख्या पारंपरिक शैक्षणिक उत्पादकता से कहीं अधिक है, और इसीलिए इस बयान पर सवाल उठे कि क्या यह वाकई संभव है।
प्रोफेसर की बात का केंद्र यह है कि AI विचार-प्रक्रिया, ड्राफ्टिंग और विश्लेषण में शोधकर्ताओं की सहायता कर सकता है। हालाँकि, इस दावे के पक्ष में कोई सार्वजनिक रूप से प्रकाशित पत्रों की सूची या विस्तृत कार्य-प्रक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि 200 पत्रों की संख्या पूर्णतः प्रकाशित लेखों की है, सह-लेखन में योगदान की है, या प्रारूपों की है।
शैक्षणिक जगत में AI के इस्तेमाल से जुड़े पारदर्शिता और गुणवत्ता के प्रश्न भी बने हुए हैं, और बयान की संख्यात्मक सटीकता को अंतिम रूप से परखा जाना अभी शेष है।
निष्कर्ष: यह बयान वास्तव में प्रोफेसर द्वारा किया गया था और उसके संदर्भ को ध्यान में रखते हुए वह ज़्यादातर सही माना जा सकता है।