ज़्यादातर सही
राष्ट्रीय खुफिया संबंधी जांच में सामने आया है कि ईरान और चीन से जुड़े समूह, साथ ही इज़राइल से जुड़े कुछ समूह, स्वायत्त AI एजेंटों का इस्तेमाल करके ऑनलाइन जनमत में हेरफेर कर रहे हैं। कुल 12 प्राथमिक स्रोतों के आधार पर इस दावे को ज़्यादातर सत्य माना गया है।
जांच में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार, ये समूह स्वायत्त AI एजेंटों के ज़रिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन फ़ोरम पर फ़र्ज़ी अकाउंट बनाकर विचार फैला रहे हैं। ये एजेंट मानव जैसी टिप्पणियां करके विवादित मुद्दों पर जनमत को एक निश्चित दिशा में मोड़ने की कोशिश करते हैं।
दावे में ईरान और चीन के अलावा इज़राइल से जुड़े समूहों के नाम भी लिए गए थे। जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि दावा बड़े पैमाने पर सही है, हालांकि हर हिस्से की पुष्टि समान स्तर पर नहीं हो सकी।
जांच में 12 प्रामाणिक स्रोतों की समीक्षा की गई। कुछ मामलों में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि ये गतिविधियां सरकारी निर्देश से हो रही हैं या स्वतंत्र रूप से काम कर रहे समूहों की ओर से, इसलिए दावे के इस पहलू को अपुष्ट ही रखा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, स्वायत्त AI एजेंटों की इस तकनीक तेज़ी से सस्ती और सुलभ होती जा रही है, जिससे जनमत में हेरफेर की घटनाओं पर नज़र रखना मुश्किल होता जा रहा है। समग्र रूप से देखा जाए तो यह दावा ज़्यादातर सही है।