ज़्यादातर सही
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के प्रोफेसर गैरी मार्कस ने दावा किया है कि AI से इंसानी विलुप्ति (extinction) से जुड़ी चेतावनियाँ हकीकत नहीं, बल्कि कहानी हैं। इस विषय पर उनके बयान को 12 प्राथमिक स्रोतों की समीक्षा के आधार पर जाँचा गया, जिसका अंतिम निष्कर्ष 'बड़े पैमाने पर सत्य' का रहा।
प्रोफेसर मार्कस, जो AI शोध और आलोचना के क्षेत्र में जाने-माने नाम हैं, का तर्क है कि AI द्वारा मानव जाति के विनाश की भविष्यवाणियाँ वास्तविक तकनीकी साक्ष्य पर आधारित नहीं हैं। उनके अनुसार यह प्रचार AI की वास्तविक क्षमताओं और सीमाओं से मेल नहीं खाता।
मार्कस का यह बयान LLM (बड़े भाषा मॉडल) और सामान्य AI क्षमताओं की भविष्य की संभावनाओं को लेकर चल रही बहस के बीच आया है, जहाँ एक ओर AI के अस्तित्वगत खतरे की चेतावनी देने वाले विशेषज्ञ हैं और दूरी रखने वाले विशेषज्ञ दूसरी ओर हैं।
कुल 12 प्राथमिक स्रोतों की समीक्षा के बाद यह पाया गया कि मार्कस का कथन बड़े पैमाने पर सत्यापित होता है, हालाँकि इस विषय पर विशेषज्ञों में मतभेद बने हुए हैं।
निष्कर्षतः, प्रोफेसर गैरी मार्कस का यह कथन AI-विलुप्ति वाद की कठपुतली के रूप में आँका गया — Verdict: ज़्यादातर सही