ज़्यादातर सही
दक्षिण कोरियाई तकनीक मीडिया में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, जिन एआई कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा चल रहा था, उन्होंने आपसी सहमति से अपनी विकास गति धीमी करने पर सहमति बनाई। इसके पीछे 'कैदी की दुविधा' (prisoner's dilemma) नामक खेल सिद्धांत की स्थिति को बताया गया है। यह विश्लेषण 12 प्राथमिक स्रोतों की समीक्षा के आधार पर 'ज़्यादातर सत्य' पाया गया।
विश्लेषण के अनुसार, एआई क्षेत्र की अग्रणी कंपनियाँ आपस में प्रतिस्पर्धा करते हुए तेज़ गति से विकास कर रही थीं। इस स्थिति में खेल सिद्धांत का 'कैदी की दुविधा' सिद्धांत लागू होता है — यदि सभी कंपनियाँ मिलकर गति धीमी कर दें, तो सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज़ से यह फ़ायदेमंद हो सकता है, लेकिन कोई भी कंपनी अकेले तेज़ रफ़्तार अपनाकर बाज़ार में बढ़त हासिल कर सकती है। इसीलिए बिना आपसी भरोसे के धीमा करने की सहमति कायम रखना मुश्किल है।
विश्लेषण के अनुसार, यही कारण है कि जिन कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा चल रहा था, वे भी 'गति धीमी करने' की सहमति के लिए सहमत हुईं — सभी पक्षों को यह आश्वासन चाहिए कि दूसरी कंपनियाँ भी वादा निभाएँगी। यदि कोई एक कंपनी सहमति तोड़कर तेज़ विकास करती है, तो बाकी कंपनियाँ पिछड़ जाने का जोखिम उठाती हैं।
इस विश्लेषण में एआई कंपनियों के बीच इस तरह की सहमति की संरचना को खेल सिद्धांत के नज़रिए से समझाया गया है, और यह 12 प्राथमिक स्रोतों की समीक्षा के आधार पर 'ज़्यादातर सत्य' पाया गया — हालाँकि इसमें कुछ अनिश्चित पहलू भी हैं।
Verdict: ज़्यादातर सही